UPI MDR पर शुल्क 1 जनवरी 2027 तक टल सकता है: त्योहारी सीज़न में दुकानदारों की बिक्री पर कटौती नहीं
UPI से पेमेंट लेने वाले दुकानदारों और ऑनलाइन सेलर्स के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। जिस UPI MDR शुल्क की शुरुआत 15 अक्टूबर 2026 से होनी थी, उसे अब 1 जनवरी 2027 तक टाला जा सकता है। यह खबर 8 अक्टूबर 2026 को सामने आई, जब Financial Express ने इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से बताया कि सरकार रोलआउट को टालने पर विचार कर रही है। Business Standard, Indian Express और Inc42 ने भी इस रिपोर्ट को कवर किया।
एक बात साफ रखना ज़रूरी है: यह अभी सिर्फ खबर है, पक्का फैसला नहीं हुआ है। अंतिम निर्णय आने वाले कुछ दिनों में होने की उम्मीद है।
क्यों टल रहा है शुल्क? त्योहारी सीज़न और व्यापारी विरोध
इसके पीछे दो बड़ी वजहें बताई जा रही हैं। पहली — खुदरा व्यापारियों के संगठनों का ज़बरदस्त विरोध। दूसरी — अक्टूबर से दिसंबर तक चलने वाला त्योहारी सीज़न, जो साल की सबसे बड़ी बिक्री का समय होता है। सरकार नहीं चाहती कि इस पीक समय में दुकानदारों पर कोई नया शुल्क लगे।
NPCI की UPI और सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमेटी ने 7 अक्टूबर को रोलआउट पर चर्चा के लिए बैठक भी की थी। वहीं 8 अक्टूबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि किसी भी तरह की देरी का फैसला संबंधित हितधारक (स्टेकहोल्डर्स) लेंगे।
शुल्क टलेगा, पर नियम नहीं बदलेंगे — 0.4% वाला फ्रेमवर्क क्या है?
सबसे ज़रूरी बात: अगर रोलआउट टलता भी है, तो घोषित शुल्क का ढांचा नहीं बदलेगा। सिर्फ तारीख आगे बढ़ेगी। ढांचा इस तरह है:
- ₹2,000 से ऊपर के व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) UPI पेमेंट पर 0.40% MDR लगेगा।
- एक ट्रांज़ैक्शन पर अधिकतम सीमा ₹300 तय है (₹75,000 या उससे ऊपर के पेमेंट पर यही सीमा लागू होगी)।
- बिल पेमेंट, यूटिलिटी, शिक्षा और ईंधन (फ्यूल) जैसी खास कैटेगरी में ₹2,000 से ऊपर के ट्रांज़ैक्शन पर ₹5 फ्लैट शुल्क लगेगा।
- ग्राहक कुछ नहीं देंगे — शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा।
- ₹2,000 तक के पेमेंट, व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं।
छोटे दुकानदारों को छूट: ₹1 लाख वाली सीमा और ₹40 लाख का नया प्रस्ताव
मौजूदा नियम के तहत छोटे व्यापारी पहले से ही छूट के दायरे में हैं — जो दुकानदार UPI QR कोड के ज़रिए सीधे अपने बैंक खाते में महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, उन्हें यह शुल्क नहीं देना होगा।
अब एक और नया प्रस्ताव विचाराधीन है: सालाना ₹40 लाख तक टर्नओवर वाले कारोबारियों को छूट दी जाए। अगर यह मंज़ूर होता है, तो छूट का दायरा काफी बड़ा हो जाएगा। लेकिन ध्यान रहे — यह प्रस्ताव अभी कमेटी के पास चर्चा में है, अभी फैसला नहीं हुआ है।
दुकानदार की कमाई पर असर: त्योहारी सीज़न की बिक्री का पूरा पैसा बचेगा
छोटे दुकानदारों और ऑनलाइन सेलर्स के लिए इसका सीधा मतलब समझिए: अगर रोलआउट 1 जनवरी 2027 तक टलता है, तो पूरे त्योहारी सीज़न में ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर 0.4% की कटौती नहीं होगी। अक्टूबर से दिसंबर के बीच दुकानदार जो भी बेचेंगे, उसका पूरा पैसा उनके पास रहेगा — कोई फीस नहीं कटेगी।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि करीब 96% व्यापारी ट्रांज़ैक्शन इस शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे — सिर्फ लगभग 4% पर ही यह लागू होगा। फिर भी, त्योहारी सीज़न में हर रुपये की कीमत होती है, इसलिए देरी की खबर दुकानदारों के लिए राहत भरी है।
बाज़ार की प्रतिक्रिया: फिनटेक शेयर गिरे
रोलआउट टलने की खबर का असर 8 अक्टूबर को शेयर बाज़ार में भी दिखा। Paytm (One 97 Communications) का शेयर इंट्राडे में 10% तक गिरा और अंत में 5.42% की गिरावट के साथ ₹1,640 पर बंद हुआ। MobiKwik इंट्राडे में 8.47% फिसला और 4.57% नीचे ₹244.30 पर बंद हुआ। Pine Labs भी इंट्राडे में 4.96% तक गिरा और 4.39% की गिरावट के साथ ₹169.75 पर बंद हुआ। निवेशकों को उम्मीद थी कि अक्टूबर से MDR से इन कंपनियों की आय बढ़ेगी — देरी की खबर ने उस उम्मीद को झटका दिया।
ब्रोकरेज अनुमानों के मुताबिक, MDR से डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग इकोसिस्टम को सालाना ₹15,000 से ₹20,600 करोड़ की आय हो सकती है। देरी होने पर इस आय के करीब ढाई महीने का हिस्सा आगे खिसक जाएगा। यानी शुल्क करीब 7 साल के ज़ीरो-MDR दौर के बाद लौट रहा है — लेकिन अब थोड़ी देर से।
विरोध की पृष्ठभूमि और कोर्ट का रुख
यह फैसला अचानक नहीं आया। खुदरा व्यापारियों के संगठन AIMRA और AICPDF ने 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ का आह्वान किया था। हालांकि 30 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद यह विरोध वापस ले लिया गया।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को केंद्र के MDR फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन केंद्र, RBI और NPCI को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर को कहा था: “UPI-MDR पर फैसला पहले ही हो चुका है… मुझे नहीं लगता कि छोटा-सा शुल्क वॉल्यूम पर बड़ा असर डालेगा।” बता दें कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में UPI वॉल्यूम 22.2% बढ़ा था।
UPI की विशालता: सितंबर 2026 के आंकड़े
UPI का पैमाना समझने के लिए सितंबर 2026 के आंकड़े देखिए: 24.07 अरब ट्रांज़ैक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत ₹29.37 ट्रिलियन रही। रोज़ाना औसतन 802 मिलियन ट्रांज़ैक्शन और ₹97,913 करोड़ की वैल्यू हुई — वॉल्यूम में साल-दर-साल 22.6% और वैल्यू में 18% की बढ़त के साथ। इतने बड़े सिस्टम में छोटा-सा शुल्क भी बड़ा राजस्व पैदा करता है — इसीलिए MDR की खबर इतनी चर्चा में है।
पेमेंट एग्रीगेटर्स अभी स्पॉन्सर बैंकों के साथ बातचीत कर रहे हैं कि एक्वायरिंग बैंकों के MDR हिस्से में से उन्हें 50–80% मिले।
आगे क्या देखें (What to watch next)
अभी दो बड़े फैसले बाकी हैं। पहला — क्या रोलआउट सच में 1 जनवरी 2027 तक टलेगा? इसका जवाब आने वाले कुछ दिनों में मिलेगा। दूसरा — ₹40 लाख टर्नओवर वाली छूट का प्रस्ताव क्या मंज़ूर होगा? अगर यह पास होता है, तो लाखों छोटे और मझोले कारोबार शुल्क से बाहर हो जाएंगे। त्योहारी सीज़न खत्म होते ही जनवरी में यह तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी — तब तक दुकानदार बिना किसी कटौती के UPI पेमेंट ले सकते हैं।
तथ्य-सत्यापन नोट: इस लेख के सभी तथ्य 8 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों पर आधारित हैं। जहां फैसला अभी बाकी है (रोलआउट की देरी और ₹40 लाख की छूट), वहां स्पष्ट रूप से “अभी फैसला नहीं हुआ है” बताया गया है। कोई कमाई का वादा या अतिशयोक्ति नहीं की गई है।
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